कृत्रिम गर्भाधान का महा आभियान के साथ मिशन मिलियन सेक्स्ड ए आई का शुभारम्भ हुआ डा एम पी सिंह

उत्तर प्रदेश सरकार का पशुपालन विभाग जहां एक तरफ गौशाला एवं गौ संरक्षण को लेकर लगातार सक्रिय है एवं कार्य कर रहा है, उसी के साथ-साथ उत्तर प्रदेश सरकार के वित्तीय सहयोग से गोवंश की पशुओं में वर्गीकृत वीर्य द्वारा कृत्रिम गर्भाधान का महा अभियान "मिशन मिलियन सेक्सड ए०आई०" अभियान का भी शुभारंभ हो चुका है। पशुपालन विभाग सिद्धार्थ नगर के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ एमपी सिंह ने कहा है कि पशुपालक भाइयों के लिए खुशखबरी की बात यह है कि उत्तर प्रदेश सरकार के द्वारा उठाए गए इस क्रांतिकारी कदम से ए० आई०के लिए वर्गीकृत वीर्य का मूल्य जहां ₹300 लगता था वही घटकर ₹100 कर दिया गया है,जो निश्चित रूप से पशुपालको के आय की वृद्धि का स्रोत भी होगा और इससे पशुओ के नस्लों का सुधार भी किया जा सकता है। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ एमपी सिंह ने बताया कि इस नवीन तकनीकी अंतर्गत उच्च गुणवत्ता युक्त इच्छा अनुरूप 90% मादा संततियों की प्राप्ति होंगी। यह योजना उत्तर प्रदेश के 75 जनपदों में संचालित हो रही है। प्रदेश के समस्त पशुपालकों को मात्र रूपये ₹100 प्रति कृत्रिम गर्भाधान का सरकारी शुल्क देना पड़ेगा। यह नया कदम नस्ल सुधार के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा तथा 40% अधिक मादा संतति प्राप्त होगी,जिसके फलस्वरूप साल में अधिक दिन तक दुग्ध उत्पादन कर पशुपालन की आय में निश्चित वृद्धि भी होगी। नर बछड़ों की संख्या में 40% कमी के साथ कम दूध देने वाली माता पशुओं पर आपके द्वार पर किए जा रहे दुग्ध उत्पादन के खर्चे में कमी भी आएगी। बाहर से अधिक मूल्य लगाकर भी ज्यादा दूध देने वाली बछिया क्रय करने की परेशानियों से भी मुक्ति मिलेगी। नर बछड़ों की संख्या नियंत्रित करने के साथ-साथ सड़क दुर्घटना एवं फसल नुकसान से भी राहत मिलेगी। नर पशु एवं कम उत्पादकता वाले मादा पशुओं की संख्या में कमी आने से उनके द्वारा वातावरण में उत्सर्जित मिथेन गैस में कमी आएगी जिससे ग्लोबल वार्मिंग,जलवायु परिवर्तन में प्रदेश की सकारात्मक भागीदारी बढ़ेगी। पशुधन प्रसार अधिकारी अरुण कुमार प्रजापति ने बताया कि कृत्रिम गर्भाधान कराने से पूर्व पशुओं के गर्भ धारण करने के लिए कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए जैसे कि कृत्रिम गर्भाधान से पहले पशु को कीड़े मारने की दवा दी गई हो तथा 3 सप्ताह तक गुणवत्ता युक्त मिनरल मिश्रण खिलाया गया हो। कृत्रिम गर्भाधान के समय पशु का वजन 200 किलो के ऊपर होना चाहिए। अरुण कुमार प्रजापति ने बताया कि बछिया में दो प्राकृतिक हिट चक्र देखने के बाद ही कृत्रिम गर्भाधान करना उपयुक्त होगा। पशुओं के गर्भाशय /जननांग/ प्रसव संबंधी किसी संक्रमण अथवा समस्या से पूर्व में ग्रसित होने पर वर्गीकृत वीर्य का उपयोग उस पशु में न कराएं। कृत्रिम गर्भाधान के 28 दिन पश्चात किट द्वारा गर्भ परीक्षण अवश्य कराएं तथा पशु गर्भित ना होने की दशा में दोबारा हिट पर आने पर वर्गीकृत से ही पुनः कृत्रिम गर्भाधान कराएं। पशुओं में प्रातः काल या देर सायं काल कृत्रिम गर्भाधान कराना उचित होता है। पशु के हिट में आने पर शुरू के 18 घंटे के पश्चात ही कृत्रिम गर्भाधान कराना अच्छा माना जाता है। पशुपालक को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि कृत्रिम गर्भाधान कराने के उपरांत खाली सीमेन स्ट्रा संतति उत्पन्न होने तक अवश्य संभाल कर रखें। कृत्रिम गर्भाधान हेतु चयनित पशुओं का बीमा कराना उचित होगा पशु बीमा है तो उत्तर प्रदेश सरकार एवं भारत सरकार के संयुक्त सहयोग से 70 से 90% की सब्सिडी भी प्रदान की जाती है। वर्गीकृत वीर्य से कृत्रिम गर्भाधान कराने हेतु पशुपालक को अपने नजदीकी पशु चिकित्सालय से संपर्क करना चाहिए। उक्त जानकारी पशुधन प्रसार अधिकारी अरुण कुमार प्रजापति ने दी।

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