अपराध का अन्त संवाददाता बस्ती
कृषि विज्ञान केंद्र, बस्ती में हुआ । कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रभारी अधिकारी डॉ. पी.के. मिश्रा ने की। उन्होंने मशरूम उत्पादन को कम लागत, कम स्थान एवं कम समय में रोजगार और आय का प्रभावी साधन बताते हुए ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार एवं उद्यमिता के लिए प्रेरित किया। साथ ही उन्होंने धान एवं गेहूं के भूसे जैसे कृषि अवशेषों का मशरूम उत्पादन में उपयोग, उत्पादन इकाई की स्थापना, तापमान एवं आर्द्रता प्रबंधन तथा मशरूम उत्पादन के बाद बचे अवशेषों के कम्पोस्ट एवं जैविक खाद के रूप में उपयोग की जानकारी दी।
प्रशिक्षण के कोर्स कॉर्डिनेटर डॉ. प्रेम शंकर, वैज्ञानिक (पादप सुरक्षा) ने प्रतिभागियों का पूर्व-मूल्यांकन किया तथा बटन मशरूम की उत्पादन तकनीक, गुणवत्तापूर्ण स्पॉन का चयन, भूसे का उपचार एवं पाश्चुरीकरण, बैग तैयार करने, स्पॉनिंग, इनक्यूबेशन, फलन एवं कीट-रोग प्रबंधन पर विस्तृत जानकारी दी।
डॉ. वी.बी. सिंह, वैज्ञानिक (पादप प्रजनन एवं आनुवंशिकी) ने मशरूम की उपयुक्त प्रजातियों का चयन, गुणवत्तापूर्ण स्पॉन की पहचान, स्पॉन की गुणवत्ता के प्रमुख लक्षण तथा उत्पादन एवं उपज में गुणवत्तापूर्ण स्पॉन की भूमिका पर प्रकाश डाला।
डॉ. अंजलि वर्मा, वैज्ञानिक (गृह विज्ञान) ने मशरूम के प्रोटीन, खनिज एवं अन्य पोषक तत्वों, सुरक्षित प्रसंस्करण एवं भंडारण तथा मशरूम पाउडर, अचार, नमकीन एवं अन्य मूल्यवर्धित उत्पादों के निर्माण की तकनीक पर जानकारी दी। उन्होंने मूल्य संवर्धन के माध्यम से अतिरिक्त आय एवं महिला उद्यमिता की संभावनाओं पर विशेष जोर दिया।
श्री आर.वी. सिंह, वैज्ञानिक (कृषि प्रसार) ने मशरूम उत्पादन को व्यवसाय के रूप में अपनाने, लागत एवं लाभ का आकलन, ब्रांडिंग, पैकेजिंग, स्थानीय बाजार से जुड़ाव तथा प्रशिक्षण के बाद उद्यम स्थापना के संबंध में जानकारी प्रदान की।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को मशरूम उत्पादन से पोषण, रोजगार, स्वरोजगार एवं आय सृजन से जोड़ते हुए वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करने पर विशेष जोर दिया गया। प्रशिक्षण में जनपद के विभिन्न ब्लॉकों के 25 नवयुवक एवं युवतियों ने प्रतिभाग किया।