अपराध का अन्त संवाददाता
रतनसेन महाविद्यालय, बाँसी, सिद्धार्थनगर के उर्दू विभाग द्वारा दिनांक- 17 अक्टूबर, 2026 को महान शिक्षाशास्त्री एवं समाज सुधारक सर सैय्यद अहमद खां की जन्म जयन्ती के अवसर पर एकदिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के संयोजक एवं उर्दू विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. शरीफुद्दीन ने सर सैय्यद के जीवन से जुड़े हुए समस्त पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए गोष्ठी में आए हुए समस्त विद्वतजनों का स्वागत किया।
मुख्य अतिथि के रूप में सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ॰ बाल गंगाधर ने सर सैयद के
शैक्षणिक विचारों के साथ-साथ उनके सामाजिक विचारों पर प्रकाश डाला, साथ ही आधुनिक विचारकों एवं प्राचीन विचारकों के सापेक्ष में उनके वैज्ञानिक नजरिए को प्रस्तुत किया।
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ॰ संतोष कुमार सिंह ने सर सैयद के शिक्षा सम्बन्धी विचारों को साझा किया। इस अवसर पर उर्दू विभाग के विद्यार्थियों द्वारा सर सैयद के जीवन दर्शन पर विविध विचारों को व्यक्त किया गया। गोष्ठी में शोध छात्र शफीक अहमद ने उनके जीवन पर प्रकाश डाला। छात्रा रोनक, इकरा, जन्नत, रोजी, जुस्तजू, शादाब खान, सैफुरहमान, नूरसबा, रोशनी, वंदना एवं शबाना ने काव्य पंक्तियों के माध्यम से सर सैय्यद की विशेष तालीम को प्रस्तुत किया। समाजशास्त्र विभाग के डॉ॰ देवराज सिंह एवं डॉ॰ केदारनाथ गुप्ता ने सर सैयद की गंगा जमुनी तहजीब को हमारे मुल्क में अमन कायम करने में प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। इस दौरान कार्यक्रम के सह संयोजक एवं बी.एड. विभाग के वरिष्ठ सहायक आचार्य डॉ. हंसराज कुशवाहा ने कहा कि सर सैयद अहमद खां एक महान शिक्षाविद् एवं समाज सुधारक थे। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन एवं राष्ट्र के उन्नयन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। डाॅ. कुशवाहा ने गोष्ठी में आए हुए समस्त विद्वतजनों, शोधार्थियों एवं समस्त प्रतिभागियों को धन्यवाद ज्ञापित किया। इस कार्यक्रम में डॉ. किरन देवी, डॉ॰ अरविन्द कुमार मौर्य, पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा, डॉ. देवेंद्र प्रसाद, डॉ. सुनीता त्रिपाठी, मनोज कुमार मौर्य, ज्ञानमती, धनंजय, हरप्रीत, समस्त कर्मचारीगण एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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