अपराध का अन्त संवाददाता
50 प्रतिशत से अधिक कर्मचारी कार्यरत है जिले म डायरेक्ट ट्रेन न होने से कठिन होती है यात्रा करने के लिए होती है समस्या सिद्धार्थनगर। पश्चिमी यूपी के सबसे अधिक अधिकारी व कर्मचारी जिले में कार्यरत हैं, लेकिन उन्हें छुट्टियों में घर जाना हो तो जिले से कोई भी ट्रेन जनपद से मुरादाबाद के लिए नहीं जाती है। लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यात्री गोरखपुर या लखनऊ से यात्रा करने के लिए मजबूर होते हैं, जिससे यात्रियों को अधिक किराया देकर यात्रा करना पड़ता है।जिले के सरकारी विभाग में कार्यरत कर्मचारियों में सबसे अधिक कर्मचारी पश्चिमी यूपी से है, जो जिन्हें हापुड़, मुरादाबाद, बरेली, के लिए यात्रा करना पड़ता है। जिले से एक भी ट्रेन इन शहरों से होकर नहीं जाती है, जिससे यात्रियों को गोरखपुर व लखनऊ पहुंचकर यात्रा करनी पड़ती हैं।जिले में कार्यरत कर्मचारियों ने बताया कि परिवार से मिलने जाना हो या उन्हें अपने पास बुलाना हो तो कोई भी ऐसा ट्रेन नही हैं, जिससे लोगों को अपने पास बुलाने में आसानी हो। जिले से दिल्ली के लिए तीन ट्रेन जाती हैं, इन्हीं ट्रेनों में से कोई एक ट्रेन लखनऊ से बरेली, मुरादाबाद, हापुड़ के लिए चलाई जाए तो सुविधा हो सकती है। लोगों ने बताया कि पश्चिमी यूपी के 50 प्रतिशत से अधिक अधिकारी व कर्मचारी जिले में कार्यरत है। हमेशा किसी न किसी को अपने जिले में जाना होता है।सिद्धार्थनगर से पश्चिमी यूपी के लिए ट्रेन नहीं है। इस कारण यात्रा करने में परेशानी होती है। ट्रेनों की संख्या बढ़ाने की आवश्यकता है।चौधरी बालेश कुमार अमरोहा जिले में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कर्मचारियों की संख्या अधिक है। इसे ध्यान में रखते हुए ट्रेन चलाने की आवश्यकता है। ट्रेन से यात्रा करनी होती है तो गोरखपुर जाना पड़ता है।विपिन कुमार, मुरादाबाद ब्रजदीप सिंह जिला संयुक्त चिकित्सालय सिद्धार्थ नगर स्टेशन का नाम हापुड़ मे हरोज आलम,मुरादाबाद वर्जन दिल्ली के कानपुर होते हुए जाने वाली तीनों ट्रेनों में से किसी एक ट्रेन को बरेली रूट से भेजने के लिए प्रस्ताव रखा जाएगा।ट्रेनों की आवश्यकता है।जगदंबिका पाल सांसद डुमरियागंज के लोक प्रिय होने कारण कई विभागीय लोगों ने आवागमन को लेकर डुमरियागण्ज के
सांसद जगदंबिका पाल से ट्रेनों की संचालन हेतु मांग उठाई गई है

