सिद्धार्थनगर. प्राथमिक शिक्षा को सरल, सरस, गुणवत्तापूर्ण एवं बालोपयोगी बनाने में टीयलयम अर्थात सहायक शिक्षण सामग्रियों का महत्वपूर्ण योगदान होता है. अत: सभी शिक्षक परिवेशीय संसाधनों से शून्य निवेश आधारित सस्ते, टिकाऊ एवं बहुपयोगी टीयलयम का निर्माण कर कक्षा शिक्षण में उनका प्रयोग अवश्य सुनिश्चित करें.
डायट बांसी में आयोजित तीन दिवसीय जनपद स्तरीय टीयलयम कार्यशाला के समापन समारोह में उपरोक्त विचार प्राचार्य राम मूरत जी ने व्यक्त किए. कार्यशाला में नौगढ़, बर्डपुर, बढ़नी, शोहरतगढ़, इटवा आदि के नोडल संकुल शिक्षकों ने भाषा, गणित एवं विज्ञान विषयों के रोचक एवं प्रभावपूर्ण शिक्षण के लिए विविध टीयलयम का निर्माण एवं प्रदर्शन किया. डायट प्रवक्ता सतीश धवन के संयोजन एवं संदर्भदाता अपूर्व श्रीवास्तव तथा अरविन्द कुमार के निर्देशन में संपन्न कार्यशाला में रामप्रकाश मिश्र, धर्मेन्द्र सिंह, नियाज़ अहमद, अनिल पांडेय, दीपक श्रीवास्तव, मदनलाल, जमील अहमद, धर्मेन्द्र चौधरी, राजेश कुमार, आलोक श्रीनेत, हरिनारायण शुक्ला आदि की प्रतिभागिता उल्लेखनीय रही. समापन समारोह में प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किये गए.
जनपद सिद्धार्थनगर में प्रभावी शिक्षण हेतु टीयलयमआवश्यक प्राचार्य
byमनोज कुमार संपादक
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