सिद्धार्थ नगर संवाददाता
उत्तर प्रदेश बिहार राज्य के तरह चल पड़ा सिद्धार्थनगर जैसे बिहार में जंगलराज समेत वादी व्यवस्था में कानून और न्याय आम आदमी को मिल नहीं पाता वही हालत अब उत्तर प्रदेश में बनती जा रही है यह टिप्पणी जिले के समाजसेवियों ने करते हुए दो 3 ज्वाला उदाहरण देकर अवगत कराया कि किस तरह राजस्व परिषद भ्रष्टाचार में लिप्त फैसले को बेचने वाले तहसीलदारों को जिलों में भेजती रहती है गोरखपुर में भारी मात्रा में संपत्ति कमाने वाले सत्य प्रकाश सिंह सहतवार को तहसीलदार नौगढ़ बनाकर उत्तर प्रदेश सरकार ने भेजा जब उसने फैसले बेचने का रिकॉर्ड बना शुरू किया तो बजाएं उसकी जांच संपत्ति जब्ती करने उत्तर प्रदेश सरकार ने उसे बांसी तहसील हस्तांतरित कर दिया फिर राजस्व परिषद ने एक तहसीलदार न्यायिक लालसा प्रसाद को तहसील नौगढ़ तैनात किया उसने सादे पन्ने की वसीयत जो कचहरी के मुंशी बनाते हैं उसे पर एक एक लाख लेकर किसानों की जमीन का फैसला करके 50 लाख से अधिक रकम कमा कर कहीं से रिटायर होकर आगरा जनपद में 15 करोड़ का आलीशान मकान और फार्म हाउस बनाकर यहां के किसानों को किस तरह बर्बाद किया यहां माजरा हाल में पीड़िता सुमन सिंह ने प्रकाश में लाया उन्होंने बताया कि उनका देवर रविंद्र बहादुर सिंह पुत्र रघुपति सिंह 25 वर्ष पहले मधुकरपुर ग्राम जो मुख्यालय से सटा है जासूसी में अपने भाई धीरेंद्र बहादुर सिंह के साथ क्रिया किया जब वीरेंद्र बहादुर मर गए तो बजाएं उनकी पत्नी सुमन सिंह का वरासत करवाएं अपने दो मृतक भाइयों देवेंद्र बहादुर और धीरेंद्र बहादुर की हाशिया गवाही दिखाकर एक सादे पन्ने की वसीयत पर लालसा प्रसाद तहसीलदार न्यायिक को रिश्वत देकर जो 1 बटा दो हिस्सा विरेंद्र की जमीन थी उसे भी अपने नाम करवा लिया तथा अपने हिस्से की जमीन 20 लाख में बेचकर लखनऊ में जमीन खरीद कर मकान बनवा शुरू कर दिया सुमन सिंह जो ग्राम देवरा बाजार की आगनबाडी कार्य करता है उन्हें जब इस धोखा घड़ी की जानकारी हुई तो अपना कागज निकलवाना शुरू किया तो पता चला की रविंद्र बहादुर द्वारा अपने हिस्से की जमीन बेच कर उसकी एक बटा दो हिस्से की जमीन अपने नाम करवा लिया है यह सब रविंद्र बहादुर सिंह द्वारा अपने लड़की लेखपाल श्रद्धा और सुमन सिंह की मदद से किया है जो एसडीएम नौगढ़ से सिफारिश पर अपने मॉल तहसील में ही तैनात है वहां भी देवरा बाजार से सटे ग्राम सोनवाल कभी पकड़ी कभी जोगिया अपनी पुत्री लेखपाल के जरिए और तहसीलदार न्यायिक महिला की तैनाती नौगढ़ तहसील में होने का फायदा उठाकर अब फर्जी वसीयत पर दूसरे पाटीदार की करोड़ों की जमीन हड़पने हेतु प्रयास है यहां कलेक्टर और उप जिला अधिकारी अब तहसीलदारों पर कोई कार्रवाई नहीं करते केवल सुविधा शुल्क मिल जावे क्योंकि इनकी नियुक्ति सीधे राजस्व परिषद लखनऊ करता है रविंद्र बहादुर सिंह भी जाली कार्रवाई से एक नया मामला सामने आया की नौगढ़ रजिस्ट्री के यहां उसने अपने हक से ज्यादा जमीन बेचकर पैसा ले लिया एसडीएम नौगढ़ डीएम सिद्धार्थ नगर अब उक्त महिला लेखपाल और उसके पिता रविंद्र बहादुर सिंह के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं किया है